NBT सुरक्षा कवच कैंपेन ने नजफगढ़ में अपराध को दी कड़ी मार

NBT सुरक्षा कवच कैंपेन ने नजफगढ़ में अपराध को दी कड़ी मार

जब सुभाष चंद, एस. एच. ओ. नजफगढ़ पुलिस थाना ने NBT सुरक्षा कवच कैंपेन की घोषणा की, तो शहर के 5 लाख नागरिकों में असली राहत की लहर दौड़ गई। यह पहल अंकित सिंह, डीसीपी, द्वारका जिला की सक्रिय भागीदारी से चल रही है, और नवभारत टाइम्स के सहयोग से जनता को सुरक्षा का नया कवच प्रदान कर रही है। नजफगढ़, जो दिल्ली देहात का सबसे बड़ा क्षेत्र (लगभग 17 वर्ग किमी) है, अब ‘नो गम‑नो‑गैंग’ अभियान के तहत गैंग‑रहित बन रहा है।

इतिहास और पृष्ठभूमि

नजफगढ़ पुलिस थाना 1903 में स्थापित हुआ था, यानी भारतीय स्वतंत्रता से कई साल पहले। यह दिल्ली के सबसे पुराने थानों में से एक है और द्वारका जिले के प्रशासनिक ढाँचे में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 17 वर्ग किलोमीटर के इस क्षेत्र में 250 से अधिक गाँव‑कॉलीनी स्थित हैं, जिनकी कुल जनसंख्या लगभग 5 लाख है। पहले इस इलाके को 'सबसे संवेदनशील' माना जाता था, जहाँ गैंग‑उत्पीड़न और चोरी‑डकैती की खबरें अक्सर सुनाई देती थीं।

NBT सुरक्षा कवच कैंपेन की प्रमुख विशेषताएँ

बताई गई NBT सुरक्षा कवच कैंपेन में पाँच डिवीजन, दस बीट और राउंड‑द‑क्लॉक पैट्रॉलिंग शामिल है। मुख्य लक्ष्य है:

  • गैंग‑संबंधी मामलों में नो गम‑नो‑गैंग अभियान को तेज़ी से लागू करना;
  • जनता को सुरक्षा ऑडिट में शामिल करना, जिससे वे अपराध के संकेतों को तुरंत रिपोर्ट कर सकें;
  • स्थानीय बाजारों, स्कूलों और शाम के समय के इलाकों में अतिरिक्त जाँच‑पड़ताल सुनिश्चित करना;
  • डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए सुरक्षा चेतावनी और जागरूकता फैलाना।

कैंपेन की शुरुआत में नवीन निशचल, एक स्थानीय पत्रकार, ने DCP अंकित सिंह से विस्तृत बातचीत की। उनका कहना था कि इस अभियान में जनता की भागीदारी ‘वास्तविक परिवर्तन की कुंजी’ है।

पुलिस‑जनता सहभागिता के मॉडल

शुरुआती चरण में, पुलिस ने नजफगढ़ के 17 बीटों में युवा स्वयंसेवकों को जोड़ा। वे प्रतिदिन 6‑9 बजे के बीच गलियों में घूमते, छोटे‑छोटे संदिग्ध व्यवहारों को नोट करते और तुरंत थाने को सूचित करते। इस मॉडल से साइबर‑बुलिंग और गैंग‑राक्षसियों के बीच की दूरी घट गयी।

शहर के 250 से अधिक गांवों के बुजुर्गों ने भी इस पहल को सराहा। एक बुजुर्ग महिला, जो अक्सर शाम के समय बाजार जाती थीं, ने कहा, “पहले रात में बाहर जाना डरावना लगता था, अब तो बच्चे भी खुले में खेलते हैं।” ऐसे व्यक्तियों की बढ़ती आत्मविश्वास ही इस कैंपेन की सफलता का प्रमाण है।

आँकड़े और प्रभाव

आँकड़े और प्रभाव

कैंपेन शुरू होने के दो महीने बाद, नजफगढ़ थाने ने अपराध प्रवृत्ति में 38% गिरावट दर्ज की। विशेष रूप से गैंग‑संबंधी मामलों में 45% कमी आई, जबकि चोरी‑डकैती के मामलों में 30% तक कमी देखी गई। पुलिस ने यह डेटा नवभारत टाइम्स को प्रदान किया, जिससे वे व्यापक रूप से प्रकाशित कर सके।

अंकित सिंह ने कहा, “यदि हम इस मॉडल को दूसरे जिलों में कॉपी‑पेस्ट करें, तो दिल्ली‑सही के अपराध दर में बहुत बड़ा सुधार हो सकता है।” उनके अनुसार, NBT के डिजिटल मददगार उपकरण (जैसे मोबाइल एप्प) ने रिपोर्टिंग को 2‑3 मिनट में घटा दिया।

भविष्य की दिशा

नजफगढ़ थाने अब कैंपेन के अगले चरण में ‘साइबर‑सुरक्षा’ वर्कशॉप्स आयोजित करने की योजना बना रहा है। इन कार्यशालाओं में युवा वर्ग को ऑनलाइन धोखाधड़ी व नेटवर्किंग के खतरे से बचाने की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, NBT कंपनी की ओर से अतिरिक्त CCTV कैमरे लगवाए जाएंगे, ताकि ‘रियल‑टाइम मॉनिटरिंग’ संभव हो सके।

समुदाय के नेता भी उम्मीद जताते हैं कि इस प्रकार के सहयोगी मॉडल से ‘सुरक्षा कवच’ पूरे दिल्ली में फैल जाएगा, और नागरिक खुद को अधिक सशक्त महसूस करेंगे।

Frequently Asked Questions

NBT सुरक्षा कवच कैंपेन का मुख्य लक्ष्य क्या है?

कैंपेन का मकसद नजफगढ़ में राउंड‑द‑क्लॉक पैट्रॉल, ‘नो गम‑नो‑गैंग’ अभियान और डिजिटल रिपोर्टिंग के ज़रिए अपराध को 30‑40% तक घटाना है, जिससे नागरिक सुरक्षा महसूस करें।

कैंपेन में कौन‑कौन शामिल हैं?

मुख्य तौर पर सुभाष चंद (एस. एच. ओ.), अंकित सिंह (डीसीपी) और नवभारत टाइम्स की रिपोर्टिंग टीम शामिल हैं, साथ ही स्थानीय स्वयंसेवक और NBT की तकनीकी टीम भी सहयोग दे रही है।

नजफगढ़ में crime rate कितना घटा?

पहले दो महीनों में कुल अपराध में 38% की गिरावट आई, जबकि गैंग‑संबंधी मामलों में 45% तक कमी देखी गई। यह आंकड़े स्थानीय पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट से पुष्टि होते हैं।

क्या यह मॉडल अन्य जिलों में लागू होगा?

डीसीपी अंकित सिंह ने कहा है कि यदि नजफगढ़ में परिणाम सकारात्मक रहे तो यह मॉडल दिल्ली के अन्य डीक्लाइन वाले जिलों में दोहराया जाएगा, खासकर जहाँ गैंग‑क्राइम की समस्या है।

आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?

आगामी महीनों में अतिरिक्त CCTV कैमरों की स्थापना, साइबर‑सुरक्षा वर्कशॉप और मोबाइल ऐप के माध्यम से त्वरित रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत करने की योजना है, ताकि सुरक्षा कवच और भी दृढ़ हो सके।

9 टिप्पणि

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    Madhu Murthi

    अक्तूबर 3, 2025 AT 05:52

    नजफगढ़ में अब गैंग नहीं रहेगा, देश की सच्ची सुरक्षा की नींव रखी गई। 💪🇮🇳

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    Amrinder Kahlon

    अक्तूबर 13, 2025 AT 21:52

    वाह, अब पुलिस के साथ जनता भी मिलकर काम करेगी, जैसे हर जगह ऐसा ही होता है।

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    Abhay patil

    अक्तूबर 24, 2025 AT 13:52

    यह पहल समुदाय की आत्मविश्वास को बढ़ाएगी। युवा स्वयंसेवक गलियों में उपस्थित रहेंगे। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों में दोहराया जा सकता है। पुलिस और लोग मिलकर अपराध को 2‑3 मिनट में रिपोर्ट करेंगे। अंत में सुरक्षा का कवच सबके लिए सशक्त होगा

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    Neha xo

    नवंबर 4, 2025 AT 04:52

    नजफगढ़ के बुजुर्गों की आवाज़ सुनना साहस की बात है। वह कहती हैं कि अब बच्चे खुले में खेलते हैं। यह बदलाव वास्तविक प्रतिबद्धता को दर्शाता है

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    Rahul Jha

    नवंबर 14, 2025 AT 20:52

    डेटा दिखाता है 38% गिरावट, शानदार काम! 📊👍

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    Gauri Sheth

    नवंबर 25, 2025 AT 12:52

    आज की तारीख में NBT का कैंपेन एक मिसाल बन गया।
    लेकिन इस सफलता के पीछे कई छोटे‑छोटे बलिदान छुपे हैं।
    गांवों के लोग रोज़ रात भर पैट्रोल सुनते थे और डर के मारे स्लीप नहीं लेते थे।
    अब उन्हें सुरक्षा की नींव मिल गई, पर हमें याद रखना चाहिए कि यह स्थायी नहीं है।
    यदि सरकार तुरंत फंड कट देती है तो फिर से अंधेरा छा जायेगा।
    जनता को यह महसूस होना चाहिए कि सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं है।
    हर कोई मिलकर गंदगी साफ करे तो ही शहर सुरक्षित रहेगा।
    साथ ही डिजिटल रिपोर्टिंग को सही ढंग से उपयोग करना चाहिए, नहीं तो डेटा भटकेगा।
    मैं यहाँ यह कह रहा हूँ कि नैतिकता की कमी कभी भी कोई भी तकनीक नहीं भर सकती।
    युवा वर्ग को अभी भी सही मार्गदर्शन की जरूरत है, नहीं तो वे फिर से गैंग में फँस सकते हैं।
    स्कूलों में सुरक्षा शिक्षा को अनिवार्य बनाना चाहिए।
    माता‑पिता को भी बच्चों को खुला छोड़ने से पहले सतर्क रहना चाहिए।
    इस अभियान ने दिखाया है कि हम जब चाहते हैं तो बदलाव संभव है।
    लेकिन यह बदलाव टिकाऊ बनाने के लिए निरंतर निगरानी चाहिए।
    अंत में मैं यही कहूँगा कि सच्ची सुरक्षा तभी आती है जब हम एक‑दूसरे का सम्मान और समर्थन करें।
    अगर यही भावना नहीं रहेगी तो फिर कोई भी कैंपेन फेंका हुआ कागज जैसा रहेगा।

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    om biswas

    दिसंबर 6, 2025 AT 04:52

    अगर यही मॉडल नजफगढ़ में काम करता है तो दिल्ली के बाकी इलाकों को भी यही अपनाना चाहिए, नहीं तो देश की सुरक्षा खतरे में है

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    sumi vinay

    दिसंबर 16, 2025 AT 20:52

    ऐसे कदम हमें उम्मीद की नई रोशनी देते हैं, चलो साथ मिलकर आगे बढ़ें

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    Anjali Das

    दिसंबर 27, 2025 AT 12:52

    कुछ लोग अभी भी गैंग को सहन करते हैं, वह बस सीख नहीं रहे

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